लेबर कॉस्ट कैलकुलेटर
रेट देने से पहले काम की कुल लेबर कॉस्ट का अंदाज़ा लगाएँ: कितने मज़दूर, कितने दिन, क्या दिहाड़ी — और ऊपर से थोड़ा बफ़र।
काम की लेबर कॉस्ट कैसे निकालें
बेस कॉस्ट = मज़दूर × दिन × दिहाड़ी रेट। 6 मज़दूरों की टीम ₹550/दिन पर 20 दिन काम करे, तो ₹66,000 की मज़दूरी बनती है। ऊपर से समझदार ठेकेदार 5–15% बफ़र रखते हैं — बारिश, दोबारा काम और ओवरटाइम के लिए। यही बफ़र मुनाफ़े वाले रेट और घाटे वाले रेट का फ़र्क़ है।
अंदाज़ा आधा काम है — बाक़ी आधा है काम चलते हुए असली खर्च जानना। रोज़ की हाज़िरी अंदाज़े से मिलाते रहें, तो दूसरे हफ़्ते में ही पता चल जाता है कि काम बजट में है या ऊपर जा रहा है — आख़िरी बिल पर पछताने से पहले।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अंदाज़े में कितना बफ़र रखें?+
धंधे और मौसम के हिसाब से 5% से 15%। बारिश के मौसम का बाहरी काम और दोबारा-काम वाले जॉब में ज़्यादा, अंदर के काम में कम।
क्या ओवरटाइम भी अंदाज़े में जोड़ें?+
डेडलाइन टाइट है तो हाँ — OT घंटों का अलग अंदाज़ा लगाएँ या बफ़र में ही रखें। जल्दी वाले कामों में मज़दूरी का 5–10% OT में जाता ही है।
असली लेबर कॉस्ट को अंदाज़े से कैसे मिलाएँ?+
हर मज़दूर की रोज़ हाज़िरी लगाएँ और एडवांस उसी दिन दर्ज करें। Laborbook ऐप में किसी भी दिन असली मैन-डेज़ और बनी हुई मज़दूरी दिख जाती है।
अंदाज़े के आगे असली खर्च भी देखें
Laborbook में रोज़ की हाज़िरी और एडवांस दर्ज होते हैं — काम चलते हुए असली लेबर कॉस्ट पता रहती है।