दिहाड़ी सैलरी कैलकुलेटर
मज़दूर की सैलरी का पूरा हिसाब एक जगह — हाज़िरी के दिन, आधे दिन, ओवरटाइम और एडवांस। यही हिसाब Laborbook हर महीने अपने आप करता है।
दिहाड़ी सैलरी का हिसाब कैसे होता है
सीधा फ़ॉर्मूला है: सैलरी = (दिहाड़ी रेट × पूरे दिन) + (रेट ÷ 2 × आधे दिन) + ओवरटाइम − एडवांस। जैसे ₹500 दिहाड़ी वाला मज़दूर 24 पूरे दिन और 2 आधे दिन आया, 10 घंटे ओवरटाइम (₹80/घंटा) किया और ₹2,000 एडवांस लिया — तो बनता है ₹12,000 + ₹500 + ₹800 − ₹2,000 = ₹11,300।
गलती गुणा-भाग में नहीं, हाज़िरी और एडवांस याद रखने में होती है। एक भूला हुआ आधा दिन या ₹500 का एडवांस, 10 मज़दूरों में हर महीने हज़ारों का नुकसान बन जाता है। इसीलिए समझदार ठेकेदार रोज़ हाज़िरी लिखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आधे दिन की मज़दूरी कैसे गिनते हैं?+
आम तौर पर दिहाड़ी रेट का आधा। यही तरीका कंस्ट्रक्शन, वर्कशॉप और दुकानों में सब जगह चलता है।
एडवांस कब घटाना चाहिए?+
एडवांस आखिरी सैलरी से सीधा घटता है। पहले पूरी सैलरी और ओवरटाइम जोड़ें, फिर महीने भर के सारे एडवांस घटा दें।
कई मज़दूरों की हाज़िरी और एडवांस का हिसाब कैसे रखें?+
रोज़ का रजिस्टर ही भरोसेमंद तरीका है। Laborbook ऐप में सेकंडों में हाज़िरी लगाएँ, हर एडवांस तारीख़ के साथ दर्ज करें — महीने के आख़िर में हर मज़दूर की सैलरी अपने आप तैयार।
यह हिसाब Laborbook से अपने आप करवाएँ
रोज़ हाज़िरी लगाएँ, एडवांस दर्ज करें — हर मज़दूर की सैलरी अपने आप बनकर तैयार।